- श्री शारदा माता मंदिर, पतलौनी
शहर के शोर-शराबे से दूर, गाँव की शांत और पवित्र वादियों में विराजमान माँ शारदा का अति प्राचीन एवं आस्था का दिव्य धाम।
मध्य प्रदेश के जिला दमोह से लगभग 34 किलोमीटर दूर, दमोह–जबलपुर मार्ग पर स्थित ग्राम पतलौनी (तेजगढ़) में विराजमान श्री शारदा माता मंदिर क्षेत्र के प्रमुख धार्मिक एवं आध्यात्मिक स्थलों में से एक है। यह पावन धाम वर्षभर आस्था, श्रद्धा एवं आध्यात्मिक चेतना का प्रमुख केंद्र है।
स्थानीय जनश्रुति एवं पीढ़ियों से चली आ रही लोकमान्यताओं के अनुसार इस मंदिर का इतिहास लगभग 500 वर्ष पुराना है। कहा जाता है कि तत्कालीन तेजगढ़ के राजा तेजीसिंह लोधी ने अपनी कुलदेवी के रूप में घने वन क्षेत्र में एक प्राचीन पीपल वृक्ष के नीचे माँ शारदा की प्रतिमा की स्थापना की थी। समय के साथ यह स्थान वीरान हो गया, परंतु इसकी पवित्रता लोकविश्वास में सदैव बनी रही।
स्थानीय लोककथा के अनुसार, वर्षों बाद श्री भुन्दूलाल सेन जी को माता ने वृद्धा के रूप में दर्शन देकर इस पवित्र स्थान का पुनः जीर्णोद्धार एवं नियमित पूजा-अर्चना प्रारंभ करने का संदेश दिया। इसके बाद ग्रामीणों के सहयोग से इस स्थान का पुनर्जीवन हुआ और माँ शारदा की आराधना पुनः आरंभ हुई।
वर्ष 1970-75 के आसपास वर्तमान मंदिर का पुनर्निर्माण एवं माँ शारदा की नवीन प्रतिमा की स्थापना की गई। मंदिर के प्रथम महंत श्री भुन्दूलाल सेन जी बने। उनके ब्रह्मलीन होने के पश्चात श्री भगवत सेन जी ने मंदिर की धार्मिक परंपराओं एवं विकास कार्यों का दायित्व संभाला।
वर्ष 2017 में श्री शारदा माता बेनेफिशियल चैरिटेबल ट्रस्ट की स्थापना की गई, जिसका उद्देश्य मंदिर का संरक्षण, विकास तथा धार्मिक, सामाजिक एवं जनसेवा के कार्यों को व्यवस्थित रूप से आगे बढ़ाना है।
आज श्री शारदा माता मंदिर, पतलौनी हजारों श्रद्धालुओं की अटूट आस्था का केंद्र है। चैत्र एवं शारदीय नवरात्रि के अवसर पर यहाँ भव्य धार्मिक आयोजन होते हैं। विशेष रूप से चैत्र नवरात्रि से पूर्णिमा तक विशाल मेला आयोजित होता है, जिसमें मध्य प्रदेश सहित अन्य राज्यों से भी श्रद्धालु माता के दर्शन के लिए आते हैं। स्थानीय परंपरा के अनुसार इस अवधि में दही-हांडी का आयोजन भी किया जाता है, जो इस क्षेत्र की विशिष्ट सांस्कृतिक पहचान है।
माँ शारदा के इस पावन धाम में आने वाले श्रद्धालु श्रद्धा, विश्वास और भक्ति के साथ अपने जीवन की मंगलकामनाएँ लेकर माता के चरणों में शीश नवाते हैं। गाँव की शांत प्राकृतिक गोद में स्थित यह मंदिर आज भी आध्यात्मिक शांति, भारतीय संस्कृति और सनातन परंपरा का जीवंत प्रतीक है।
धार्मिक परामर्श एवं आध्यात्मिक सेवा
श्री शारदा माता मंदिर, पतलौनी में दादा गुरु के समय से लगभग 50 वर्षों से महंत परंपरा के माध्यम से श्रद्धालुओं का धार्मिक मार्गदर्शन किया जा रहा है।
श्रद्धालुओं की आस्था के अनुसार, जीवन में आने वाली विभिन्न प्रकार की बाधाओं, भय, नकारात्मक प्रभाव अथवा आध्यात्मिक समस्याओं के समाधान के लिए महंत जी द्वारा माँ शारदा की आराधना, पूजा-अर्चना, मंत्र-जप एवं अन्य धार्मिक अनुष्ठान किए जाते हैं।
देश के विभिन्न क्षेत्रों से श्रद्धालु अपनी आस्था और विश्वास के साथ इस पावन धाम में आते हैं और माँ शारदा की कृपा प्राप्त करने की प्रार्थना करते हैं
हमारा संकल्प (Vision)
“श्री शारदा माता मंदिर केवल पूजा का स्थान नहीं, बल्कि धर्म, संस्कृति, सेवा और समाज कल्याण का एक प्रेरणादायक केंद्र बने — यही हमारा संकल्प है।”
ट्रस्ट का उद्देश्य मंदिर की प्राचीन परंपराओं का संरक्षण करते हुए श्रद्धालुओं के लिए बेहतर सुविधाएँ विकसित करना तथा शिक्षा, गौसेवा, पर्यावरण संरक्षण, धर्मार्थ गतिविधियों एवं समाजसेवा के माध्यम से जनकल्याण के कार्यों को आगे बढ़ाना है।
महत्वपूर्ण सूचना
मंदिर के प्राचीन इतिहास से संबंधित कुछ विवरण स्थानीय जनश्रुतियों, गाँव के वरिष्ठ नागरिकों की मौखिक परंपरा तथा पीढ़ियों से चली आ रही लोकमान्यताओं पर आधारित हैं। जहाँ प्रामाणिक अभिलेख उपलब्ध हैं, वहाँ उसी के आधार पर जानकारी प्रस्तुत की गई है। भविष्य में यदि नए ऐतिहासिक दस्तावेज़ या प्रमाण उपलब्ध होते हैं, तो उन्हें भी इस इतिहास में उचित रूप से सम्मिलित किया जाएगा।
प्राचीन समय से यह पावन धाम माँ शारदा की आराधना और श्रद्धालुओं की आस्था का प्रमुख केंद्र रहा है।
यह मंदिर क्षेत्र की धार्मिक, सांस्कृतिक और आध्यात्मिक परंपराओं को पीढ़ियों से संजोए हुए है।
