🌺 परम पूज्य प्रथम महंत💐
दादा गुरु श्री भुन्दू लाल सेन जी
माँ शारदा के अनन्य उपासक एवं श्री शारदा माता मंदिर के प्रथम महंत
परम पूज्य दादा गुरु एवं प्रथम महंत श्री भुन्दू लाल सेन जी, श्री शारदा माता मंदिर, पतलौनी के पुनर्जागरण के प्रमुख प्रेरणास्रोत थे। उन्होंने अपना संपूर्ण जीवन माँ शारदा की भक्ति, सेवा, साधना और जनकल्याण के लिए समर्पित कर दिया। उनके अथक प्रयासों से यह पावन धाम आज लाखों श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र बना हुआ है।
परम पूज्य दादा गुरु
श्री भुन्दू लाल सेन जी का
जीवन परिचय
🌺 परम पूज्य दादा गुरु श्री भुन्दू लाल सेन जी का जीवन परिचय
मध्य प्रदेश के दमोह जिले से लगभग 34 किलोमीटर दूर दमोह–जबलपुर मार्ग पर स्थित ग्राम पतलौनी (तेजगढ़) में माँ श्री शारदा माता का पावन धाम स्थित है। यह स्थान क्षेत्र के बारह गांवों की आराध्य देवी एवं कुलदेवी माँ शारदा की पवित्र खेर के रूप में विख्यात है। आज यह धाम लाखों श्रद्धालुओं की आस्था, श्रद्धा एवं विश्वास का केंद्र है, जहाँ प्रत्येक वर्ष चैत्र एवं शारदीय नवरात्रि, पूर्णिमा तथा अन्य धार्मिक अवसरों पर दूर-दूर से श्रद्धालु दर्शन एवं पूजा-अर्चना के लिए आते हैं।
इस पवित्र धाम के पुनर्जागरण, मंदिर निर्माण तथा गुरु परंपरा की स्थापना में परम पूज्य दादा गुरु श्री भुन्दू लाल सेन जी का अतुलनीय एवं अविस्मरणीय योगदान रहा है।
परम पूज्य दादा गुरु श्री भुन्दू लाल सेन जी का जन्म 1 जनवरी 1921 को ग्राम पतलौनी (तेजगढ़), जिला दमोह (मध्य प्रदेश) में हुआ। उनका संपूर्ण जीवन माँ शारदा की भक्ति, सेवा, साधना एवं सनातन धर्म के प्रचार-प्रसार के लिए समर्पित रहा। वे अत्यंत सरल, विनम्र, निस्वार्थ, धर्मपरायण एवं जनसेवा के प्रति समर्पित व्यक्तित्व के धनी थे।
स्थानीय परंपरा एवं मान्यता के अनुसार लगभग 500 वर्ष पूर्व तेजगढ़ के राजा तेजीसिंह लोधी ने घने वन के मध्य अपनी कुलदेवी माँ शारदा की स्थापना एक विशाल एवं प्राचीन पीपल वृक्ष के नीचे की थी। उस समय माता की प्रतिमा काले पत्थर पर अंकित दिव्य स्वरूप में विराजमान थी। समय के साथ यह स्थान लगभग 400 वर्षों तक उपेक्षित एवं निर्जन बना रहा।
एक दिन दादा गुरु श्री भुन्दू लाल सेन जी जंगल में लकड़ी काटने गए। मार्ग भटक जाने के कारण रात्रि होने पर उन्होंने उसी प्राचीन पीपल वृक्ष के नीचे विश्राम किया। उसी पावन रात्रि उन्हें दिव्य अनुभूति हुई और एक वृद्धा के रूप में स्वयं माँ शारदा ने उन्हें दर्शन दिए।
माँ ने उन्हें वर्षों से मिट्टी और पत्तों में दब चुकी अपनी प्राचीन प्रतिमा को बाहर निकालने तथा इस पवित्र स्थान की पुनः सेवा एवं पूजा-अर्चना प्रारंभ करने का आदेश दिया। दादा गुरु जी ने माँ की आज्ञा का पालन करते हुए अत्यंत श्रद्धा एवं परिश्रम से प्रतिमा को पुनः प्रकट किया तथा नियमित पूजा-अर्चना आरंभ कर दी।
जब उन्होंने उस वृद्धा से उनके वास्तविक स्वरूप के बारे में पूछा, तब उन्होंने अपना दिव्य रूप प्रकट किया। वे कोई साधारण वृद्धा नहीं, बल्कि स्वयं जगत जननी माँ शारदा थीं। माता ने दादा गुरु जी को आशीर्वाद देते हुए कहा कि इस पावन धाम में श्रद्धा एवं विश्वास के साथ आने वाले प्रत्येक भक्त की मनोकामनाएँ पूर्ण होंगी।
माँ की आज्ञा प्राप्त होने के पश्चात दादा गुरु श्री भुन्दू लाल सेन जी ने अपना संपूर्ण जीवन इस पावन धाम की सेवा, साधना एवं संरक्षण में समर्पित कर दिया। उनके अथक प्रयासों से यह स्थान पुनः जागृत हुआ और धीरे-धीरे एक प्रमुख धार्मिक एवं आध्यात्मिक केंद्र के रूप में स्थापित हो गया।
वर्ष 1960 में उनके द्वारा मंदिर निर्माण का कार्य प्रारंभ किया गया। इसके उपरांत लगभग वर्ष 1970-75 में माँ शारदा की नवीन प्रतिमा की प्राण-प्रतिष्ठा कर भव्य मंदिर का निर्माण कराया गया। इसी काल में उन्हें श्री शारदा माता मंदिर का प्रथम महंत नियुक्त किया गया। उनके मार्गदर्शन में मंदिर की पूजा-पद्धति, धार्मिक परंपराएँ तथा सेवा व्यवस्था निरंतर विकसित होती रही।
माँ शारदा की कृपा एवं दादा गुरु जी का आध्यात्मिक मार्गदर्शन
परम पूज्य दादा गुरु श्री भुन्दू लाल सेन जी माँ शारदा के अनन्य उपासक एवं सिद्ध संतस्वरूप महंत माने जाते थे। स्थानीय जनश्रुति एवं श्रद्धालुओं की अटूट आस्था के अनुसार उन्हें माँ शारदा की विशेष कृपा एवं अनेक आध्यात्मिक सिद्धियाँ प्राप्त थीं।
दूर-दूर से हजारों श्रद्धालु अपनी धार्मिक, पारिवारिक एवं आध्यात्मिक समस्याओं के समाधान के लिए उनके पास आते थे। श्रद्धालुओं की मान्यता के अनुसार दादा गुरु जी माँ शारदा की आराधना, मंत्र-जप, पूजा-अर्चना एवं धार्मिक अनुष्ठानों के माध्यम से लोगों का आध्यात्मिक मार्गदर्शन करते थे।
अनेक श्रद्धालुओं का अनुभव एवं विश्वास है कि माँ शारदा की कृपा से निःसंतान दंपतियों को संतान सुख प्राप्त हुआ, अनेक युवाओं को रोजगार मिला, परिवारों में सुख-शांति स्थापित हुई तथा भय, नकारात्मक प्रभाव एवं विभिन्न प्रकार की आध्यात्मिक बाधाओं से मुक्ति मिली। इसी प्रकार जीवन की अनेक कठिन परिस्थितियों में श्रद्धालुओं को माँ शारदा की कृपा का अनुभव हुआ।
दादा गुरु जी का जीवन केवल मंदिर की पूजा-अर्चना तक सीमित नहीं था, बल्कि उन्होंने अपने आध्यात्मिक मार्गदर्शन एवं निस्वार्थ सेवा के माध्यम से हजारों नहीं, बल्कि लाखों श्रद्धालुओं के जीवन में आशा, विश्वास एवं नई ऊर्जा का संचार किया। यही कारण है कि आज भी लाखों श्रद्धालु उन्हें श्रद्धा एवं सम्मान के साथ स्मरण करते हैं।
🌺 गुरु परंपरा
दादा गुरु श्री भुन्दू लाल सेन जी ने अपने पुत्र परम पूज्य महंत श्री भगवत सेन जी को बचपन से ही माँ शारदा की सेवा, पूजा-अर्चना एवं आध्यात्मिक जीवन के संस्कार प्रदान किए। महंत श्री भगवत सेन जी ने अपने पूज्य पिता एवं गुरु से ही दीक्षा प्राप्त की तथा वर्षों तक उनके सान्निध्य में रहकर मंदिर की सेवा, पूजा-पद्धति एवं धार्मिक परंपराओं का गहन अध्ययन किया।
वर्ष 2005 में परम पूज्य दादा गुरु श्री भुन्दू लाल सेन जी ब्रह्मलीन हो गए। उनके ब्रह्मलीन होने के पश्चात उनके शिष्य एवं पुत्र परम पूज्य महंत श्री भगवत सेन जी ने महंत पद का दायित्व ग्रहण किया और आज भी श्रद्धा, सेवा एवं समर्पण के साथ गुरु परंपरा का निर्वहन कर रहे हैं।
🌺 आज की परंपरा
आज श्री शारदा माता मंदिर परिसर में अनेक देवी-देवताओं के मंदिर स्थापित हैं। चैत्र एवं शारदीय नवरात्रि, पूर्णिमा तथा अन्य धार्मिक पर्वों पर हजारों श्रद्धालु यहाँ दर्शन के लिए पहुँचते हैं।
श्रद्धालुओं की परंपरा के अनुसार जिनकी मनोकामनाएँ पूर्ण होती हैं, वे अपनी श्रद्धा एवं सामर्थ्य के अनुसार जवारे अर्पित करते हैं, भंडारे का आयोजन करते हैं तथा विशेष रूप से चैत्र पूर्णिमा एवं शारदीय पूर्णिमा के पावन अवसर पर माँ शारदा के दर्शन हेतु अवश्य उपस्थित होते हैं।
आज भी यह पावन धाम श्रद्धा, भक्ति, सेवा एवं सनातन संस्कृति का एक जीवंत केंद्र है, जहाँ आने वाला प्रत्येक श्रद्धालु माँ शारदा की दिव्य कृपा का अनुभव करता है।
प्रेरणास्रोत
परम पूज्य दादा गुरु श्री भुन्दू लाल सेन जी का संपूर्ण जीवन माँ शारदा के प्रति अटूट श्रद्धा, सेवा, त्याग, तपस्या एवं समर्पण का अनुपम उदाहरण है। उनके द्वारा स्थापित गुरु परंपरा, धार्मिक संस्कार एवं जनसेवा का यह महान कार्य आज भी निरंतर आगे बढ़ रहा है। श्री शारदा माता मंदिर के इतिहास में उनका योगदान सदैव स्वर्ण अक्षरों में अंकित रहेगा तथा आने वाली पीढ़ियों को धर्म, सेवा और भक्ति के मार्ग पर प्रेरित करता रहेगा।
परम पूज्य दादा गुरु श्री भुन्दू लाल सेन जी की पावन समाधि एवं प्रतिमा
श्री शारदा माता मंदिर परिसर में स्थित यह पावन समाधि स्थल परम पूज्य प्रथम महंत एवं माँ शारदा के अनन्य उपासक दादा गुरु श्री भुन्दू लाल सेन जी की तपस्या, सेवा और आध्यात्मिक साधना का पवित्र स्मारक है। श्रद्धालु यहाँ श्रद्धापूर्वक दर्शन कर आशीर्वाद प्राप्त करते हैं तथा अपनी श्रद्धांजलि अर्पित करते हैं। यह स्थान गुरु परंपरा, भक्ति और जनकल्याण की प्रेरणा का प्रतीक है।
🪷वर्तमान महंत🪷
💐परम पूज्य महंत श्री भगवत सेन जी💐
परम पूज्य महंत श्री भगवत सेन जी
वर्तमान महंत, श्री शारदा माता मंदिर, पतलौनी
परम पूज्य महंत श्री भगवत सेन जी का जीवन परिचय
परम पूज्य महंत श्री भगवत सेन जी का जन्म 06 जून 1966 को मध्य प्रदेश के ग्राम पतलौनी (तेजगढ़), तहसील तेंदूखेड़ा, जिला दमोह में हुआ। आपके पूज्य पिता परम पूज्य प्रथम महंत श्री भुन्दू लाल सेन जी तथा माता श्रीमती शांति बाई सेन जी थीं।
आपने अपनी प्रारंभिक शिक्षा ग्राम पतलौनी के विद्यालय से प्राप्त की। बचपन से ही आपका जीवन धार्मिक एवं आध्यात्मिक वातावरण में व्यतीत हुआ। आपने अपने पूज्य पिता एवं गुरु परम पूज्य दादा गुरु श्री भुन्दू लाल सेन जी से गुरु दीक्षा प्राप्त की तथा उनके सान्निध्य में संस्कृत, वैदिक पूजा-पद्धति, मंत्रोच्चार, धार्मिक अनुष्ठान एवं मंदिर सेवा की परंपराओं का अध्ययन किया।
“महंत श्री भगवत सेन जी की युवावस्था की दुर्लभ तस्वीर”
वर्षों तक गुरु सेवा करते हुए आपने मंदिर की नियमित पूजा-अर्चना, वैदिक अनुष्ठानों, धार्मिक आयोजनों तथा श्रद्धालुओं की सेवा का व्यावहारिक अनुभव प्राप्त किया। वर्ष 2005 में परम पूज्य दादा गुरु श्री भुन्दू लाल सेन जी के ब्रह्मलीन होने के पश्चात आपने श्री शारदा माता मंदिर, पतलौनी के महंत पद का दायित्व ग्रहण किया।
तब से आप निरंतर माँ शारदा की नियमित पूजा-अर्चना, आरती, वैदिक अनुष्ठानों, धार्मिक आयोजनों एवं श्रद्धालुओं के आध्यात्मिक मार्गदर्शन का कार्य श्रद्धा, सादगी और समर्पण के साथ कर रहे हैं। आपके मार्गदर्शन में चैत्र एवं शारदीय नवरात्रि, चैत्र पूर्णिमा, शरद पूर्णिमा, श्रीमद् देवी भागवत कथा, जवारा स्थापना एवं विसर्जन, भंडारे तथा अन्य धार्मिक एवं सांस्कृतिक आयोजन अत्यंत श्रद्धा और भव्यता के साथ संपन्न होते हैं।
आप अपने पूज्य गुरु एवं पिता परम पूज्य दादा गुरु श्री भुन्दू लाल सेन जी द्वारा स्थापित गुरु परंपरा, पूजा-पद्धति एवं धार्मिक मर्यादाओं का पूर्ण श्रद्धा एवं निष्ठा के साथ पालन करते हुए उसे आगे बढ़ा रहे हैं। आपका सदैव प्रयास रहता है कि मंदिर में आने वाले प्रत्येक श्रद्धालु को सम्मान, सहयोग एवं आध्यात्मिक मार्गदर्शन प्राप्त हो तथा माँ शारदा के दरबार से प्रत्येक भक्त श्रद्धा और संतोष के साथ लौटे।
आपके मार्गदर्शन में मंदिर परिसर के सौंदर्यीकरण, स्वच्छता, वृक्षारोपण, धार्मिक व्यवस्थाओं के सुदृढ़ीकरण तथा श्रद्धालुओं के लिए आवश्यक सुविधाओं के विकास के कार्य निरंतर किए जा रहे हैं। आपका संकल्प है कि श्री शारदा माता धाम को धार्मिक, सांस्कृतिक एवं समाजसेवा के क्षेत्र में एक आदर्श तीर्थस्थल के रूप में विकसित किया जाए, जिससे आने वाली पीढ़ियाँ भी सनातन संस्कृति, गुरु परंपरा और भारतीय आध्यात्मिक विरासत से जुड़ी रहें।
गुरु दीक्षा के बाद की तस्वीर
माँ शारदा की कृपा एवं आध्यात्मिक मार्गदर्शन
स्थानीय जनश्रुति एवं हजारों श्रद्धालुओं की अटूट आस्था के अनुसार, माँ शारदा की विशेष कृपा से महंत श्री भगवत सेन जी द्वारा किए जाने वाले पूजा-अर्चना, मंत्र-जप एवं वैदिक अनुष्ठानों से अनेक श्रद्धालुओं को मानसिक शांति, आध्यात्मिक बल और जीवन में नई आशा प्राप्त हुई है।
श्रद्धालुओं के अनुभवों के अनुसार, अनेक निःसंतान दंपतियों ने संतान प्राप्ति का सुख प्राप्त किया, अनेक युवाओं को रोजगार मिला, व्यापार एवं आजीविका में उन्नति हुई तथा परिवारों में सुख, शांति और समृद्धि का वातावरण स्थापित हुआ। अनेक श्रद्धालु यह भी मानते हैं कि माँ शारदा की कृपा एवं महंत श्री भगवत सेन जी के आध्यात्मिक मार्गदर्शन से भय, नकारात्मक प्रभाव, मानसिक अशांति तथा अन्य आध्यात्मिक बाधाओं से भी राहत प्राप्त हुई।
आज भी जिन श्रद्धालुओं की मनोकामनाएँ पूर्ण होती हैं, वे अपनी श्रद्धा एवं सामर्थ्य के अनुसार जवारे अर्पित करते हैं, भंडारे आयोजित करते हैं, कन्या पूजन, विशेष पूजा एवं धार्मिक अनुष्ठान संपन्न कराते हैं। विशेष रूप से चैत्र पूर्णिमा एवं शारदीय पूर्णिमा के पावन अवसर पर हजारों श्रद्धालु माँ शारदा के दर्शन एवं आशीर्वाद प्राप्त करने के लिए इस पावन धाम में उपस्थित होते हैं।
समाज सेवा एवं ट्रस्ट
वर्ष 2017 में आपके मार्गदर्शन में श्री शारदा माता बेनेफिशियल चैरिटेबल ट्रस्ट की स्थापना की गई। ट्रस्ट का उद्देश्य मंदिर का संरक्षण एवं विकास, धार्मिक गतिविधियों का संवर्धन, गौसेवा, शिक्षा, पर्यावरण संरक्षण तथा समाजसेवा के कार्यों को आगे बढ़ाना है।
भविष्य में विद्यालय, गौशाला, धर्मशाला एवं वृद्धाश्रम जैसे जनकल्याणकारी कार्यों को विकसित करने का भी संकल्प लिया गया है।
🌺 पारिवारिक जीवन
गृहस्थ जीवन का पालन करते हुए भी महंत श्री भगवत सेन जी पूर्णतः धर्म एवं समाज सेवा के लिए समर्पित हैं। आपकी धर्मपत्नी श्रीमती सुशीला सेन जी हैं। आपके परिवार में दो पुत्र एवं चार पुत्रियाँ हैं, जो समय-समय पर मंदिर एवं धार्मिक कार्यों में सहयोग प्रदान करती हैं।
🌺 समर्पण💐
आज परम पूज्य महंत श्री भगवत सेन जी श्रद्धा, सेवा, सादगी एवं समर्पण के साथ श्री शारदा माता मंदिर, पतलौनी की प्राचीन गुरु परंपरा को आगे बढ़ा रहे हैं। उनके मार्गदर्शन में यह पावन धाम लाखों श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र बना हुआ है तथा सनातन धर्म, सेवा, भक्ति एवं आध्यात्मिक चेतना का प्रकाश निरंतर प्रसारित कर रहा है।
परम पूज्य महंत श्री भगवत सेन जी का जीवन धर्म, सेवा, सादगी, गुरु भक्ति एवं माँ शारदा के प्रति पूर्ण समर्पण का प्रेरणादायी उदाहरण है। उनके मार्गदर्शन में श्री शारदा माता धाम निरंतर आध्यात्मिक चेतना, जनसेवा और सनातन संस्कृति के संरक्षण का कार्य कर रहा है।
🌺 ॥ जय माँ शारदा ॥ 🌺
